पर्यावरण प्रदूषण के बारे में एक कहानी मशहूर है जो फ्रांस की जेन द ला फॉन्टेन द्वारा कही गई थी।
एक बार जंगल में महामारी फैलने पर राजा शेर ने सभी जानवरों की सभा बुलाई और उनसे महामारी का कारण पूछा। सभी जानवरों ने बारी-बारी से "मैं ज़िम्मेवार नहीं' जैसा उत्तर दिया। अंत में एक मरियल, पिद्दी से गधे की बात बारी आई और इससे पहले कि वह कुछ कहता - शेर गरजा कि "तू ही इस महामारी का ज़िम्मेदार है' और उछलकर उसका काम तमाम कर दिया। आज हम भी यही कर रह हैं, बिगड़ते पर्यावरण के लिए वाहनों से निकलने वाले धुएं को अपराधी मान रहे हैं और धड़ल्ले से जंगलों को काटते जा रहे हैं। बलिहारी है इस नासमझ शेर की !
Saturday, March 29, 2008
Thursday, March 27, 2008
मारीशस के हिन्दी कवि की कविता...छोटे पेड़...बड़े पेड़ !
नई महानिदेशिका जैसे आई
बड़े पेड़ों की आवली से
छोटे पेड़ों को उखाड़ने का काम,पहला किया !
छोटे पेड़ों को छोटों के बीच और
बड़े पेड़ों को बड़ो के बीच रोपवाया
उस दिन से, छोटे पेड़ों ने
बड़े पेड़ बनने का सपना ही छोड़ दिया !
और बड़े पेड़ों को बड़ा होने का
अब गुमान भी न रहा !
मॉरीशस के हिन्दी कवि राज हीरामन
के कविता संग्रह 'एक ज़मीन आसमान पर' से
बड़े पेड़ों की आवली से
छोटे पेड़ों को उखाड़ने का काम,पहला किया !
छोटे पेड़ों को छोटों के बीच और
बड़े पेड़ों को बड़ो के बीच रोपवाया
उस दिन से, छोटे पेड़ों ने
बड़े पेड़ बनने का सपना ही छोड़ दिया !
और बड़े पेड़ों को बड़ा होने का
अब गुमान भी न रहा !
मॉरीशस के हिन्दी कवि राज हीरामन
के कविता संग्रह 'एक ज़मीन आसमान पर' से
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