एक वृक्ष भी बचा रहे....
अंतिम समय जब कोई नहीं जाएगा साथ
एक वृक्ष जाएगा
अपनी गौरयों -गिलहरियों से बिछुड़ कर
साथ जाएगा एक वृक्ष
अग्नि में प्रवेश करेगा वह मुझसे पहले
कितनी लकड़ियाँ लगेगी ?
श्मशान की टाल वाला पूछेगा
ग़रीब से ग़रीब भी सात मन तो लेता ही है !
लिखता हूँ अंतिम इच्छाओं में....
बिजली के दाह घर में
हो मेरा संस्कार
ताकि मेरे बाद
एक बेटे और एक बेटी के साथ
एक वृक्ष भी बचा रहे संसार में।
- नरेश सक्सैना.
Friday, May 9, 2008
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2 comments:
बहुत भावपूर्ण प्रस्तुति है, आभार.
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आप हिन्दी में लिखते हैं. अच्छा लगता है. मेरी शुभकामनाऐं आपके साथ हैं, इस निवेदन के साथ कि नये लोगों को जोड़ें, पुरानों को प्रोत्साहित करें-यही हिन्दी चिट्ठाजगत की सच्ची सेवा है.
एक नया हिन्दी चिट्ठा किसी नये व्यक्ति से भी शुरु करवायें और हिन्दी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें.
यह एक अभियान है. इस संदेश को अधिकाधिक प्रसार देकर आप भी इस अभियान का हिस्सा बनें.
शुभकामनाऐं.
समीर लाल
(उड़न तश्तरी)
मेरा एक विचार है, अगर सरकार बड़ी बड़ी योजनाओं से हटकर सिर्फ़ वृक्षारोपण पर ध्यान लगाये तो पर्यावरण और पानी की समस्या काफी हद तक हल हो सकती है. वृक्षारोपण करने और अपने लगाये वृक्षों की पूरी देखभाल करने वाले व्यक्तियों/संस्थाओं/कोर्पोरेशन को रोपित वृक्षों के हिसाब से इन्कम टेक्स/ प्रोपर्टी टेक्स में कुछ छूट देना शुरू कर दे. तो वृक्षारोपण की लोगों और कम्पनियों में होड़ लग जायेगी. हो सकता है भारत का वन क्षेत्र 35% फ़िर से पार कर जाए.
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