Wednesday, April 23, 2008

खई के पान बनारसवाला ...बनारस मैं पैदा नही होता !

बनारस और पान का अटूट बन्धन है, सदियों से यही बताया जाता रहा है , मगर सिर्फ़ किस्से-कहानियों में, फिल्मी गीतों के मुखड़ों में। हकीक़त कुछ और ही है। शायद आप जानते न हों मगर मैं तो जानता हूँ .दरअसल पूरी दुनिया में अपनी धाक जमाने वाला बनारसी पान बनारस में पैदा ही नहीं होता; वहाँ की आबोहवा पान की खेती के लिए
मुफीद नहीं है। वहाँ तो केवल पान का रंग-रोगन किया जाता है। यह पान आता है बिहार राज्य के गया जिले से जहाँ इसके सैकड़ों बरेजे हैं.बरेजा मतलब पनवाडी या यूँ कहें की पनवाड़ी जिसमें पान की खेती होती है। यह पान हरे रंग का साधारण सा दिखने वाला पत्ता होता है और उसे भेजा जाता है बनारस की पान मंडी में जहाँ इसे गरम पत्थरों की भट्टी में तपाकर सफ़ेद और नरम बनाया जाता है। लीजिये तैयार हो गया बनारस का मशहूर पान , अब दबाइये इसका भीड़ा मुँह में और याद कीजिये गया को । एक बात और....पान चाहे आप बनारसी खाएँ अथवा मीठा कलकत्ता या कड़क मद्रासी , इसकी पीक इधर-उधर न थूकिये, दाग़ आपके कपड़ों के साथ ही पर्यावरण पर पड़ेंगे जो न केवल अशोभनीय है वरन प्रदूषण भी फ़ैलाते हैं। दो ध्यान रहे .......यत्र - तत्र धूकना मना है।

-प्रणय रावत

2 comments:

नितिन व्यास said...

बढिया जानकारी!

mamta said...

ये तो नई जानकारी है। शुक्रिया।