गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर रचित गीत देश की माटी ,देश का जल हिन्दी में विख्यात कवि पंडित भवानीप्रसाद प्रसाद मिश्र द्वारा अनुदित है .......
देश की माटी देश का जल
हवा देश की देश के फल
सरस बनें प्रभु सरस बने
देश के घर और देश के घाट
देश के वन और देश के बाट
सरल बनें प्रभु सरल प्रभु
देश के तन और देश के मन
देश के घर के भाई -बहन
विमल बनें प्रभु विमल बनें


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